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रामायण कालीन क्रांतिधरा विश्व पटल पर छाई, बोद्धि वृक्ष का उदय, विदेशियों का लगा तांता

मेरठ। रामायण काल से लेकर महाभारत और इसके बाद सबसे पहले देश की आजादी का बिगुल फूंकने वाली क्रांतिधरा मेरठ में एक बार फिर नए अध्याय की शुरुआत हो गई। बाईपास स्थित स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय परिसर में प्राचीन बौद्धि वृक्ष मिलने के बाद बौद्ध धर्म के देश विदेश से आए राजनयिकों समेत बौद्ध धर्मावलम्बियों को तांता लग गया। यह बौद्धि वृक्ष विश्व भर में मेरठ को नई पहचान दिलाएगा। ऐसा माना जा रहा है कि आने वाले समय में गया के बाद बौद्ध धर्म अनुयायियों का यह दूसरा पड़ाव साबित होगा।
दिल्ली-रुड़की बाईपास पर मेरठ स्थित स्वामी विवेकानन्द सुभारती विश्वविद्यालय परिसर में डेढ़ सौ वर्ष से अधिक आयु का एक पीपल का पेड़ मिला था। इस पीपल के पेड़ पर जब बौद्ध धर्म से जुड़े लोगों की नजर पड़ी तो उन्हें इस वृक्ष में कुछ विशेषताएं दिखायी पड़ीं। इसके बाद बौद्ध धर्म के विद्वानो और वैज्ञानिकों ने इसकी खोजबीन कर रिसर्च शुरू की। लम्बी रिसर्च के बाद एक चमात्कारिक रहस्य उजागर हुआ कि यह कोई साधारण पीपल का पेड़ नहीं, बल्कि बौद्धि वृ़क्ष है। यह उसी बौद्धि वृक्ष का वंशज है, जो बिहार के गया में है और जिस वृक्ष के नीचे बैठ कर माहत्मा बुद्ध ने घोर तपस्या कर दुनिया का दुःख मिटा कर उनको सत्य की और ले जाने का ज्ञान प्राप्त किया था। पूरे विश्व में गया के बाद सुभारती मेरठ में मिले इस वृक्ष को पाकर बौद्ध धर्म के अनुयायियों के चेहरे पर चमक आ गई और वह इसको देखने के लिए जुट गए और श्रद्धा भाव से इसकी पूजा अर्चना करने लगे। शनिवार को करीब एक दर्जन बौद्ध धर्म के धर्मगुरुओं के अलावा बौद्ध धर्म को मानने वालों का समागम हुआ। सभी ने पूरे श्रद्धा भाव से उसकी विधि विधान से पूजा अर्चना की। ऐसा माना जा रहा है कि इस वृद्ध  की खोज के बाद विश्व पटल पर मेरठ जिले का एक नया अध्याय शुरू हो चुका है। आने वाले समय में यह अति प्राचीन वृक्ष पयर्टन को भी बढ़ावा देगा।


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