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जानिए प्रोफेसर डिगबाय टैंनटम ने इन्ट्यूशन या गट फीलिंग के बारे में क्या कहा

क्या आपने कभी सोचा है कि ये गट फीलिंग आती कैसे है?  'गट फीलिंग' मतलब जब भी आप कोई काम करने जा रहे है और आपको लगता है कि यार ये तो अच्छा ही होगा उसे इन्ट्यूशन या गट फीलिंग कहते है। यूनिवर्सिटी ऑफ शेफ्फील्ड के क्लीनिकल प्रोफेसर डिगबाय टैंनटम का कहना है कि इंसान का दिमाग में एक वाईफाई जैसा जाल होता है जो दूसरे व्यक्ति को देखते से ही उसके बारे में जानकारी इकट्ठा करने लगता है। जिससे हमे गट फीलिंग आती है। वहीं भाषा सिर्फ बातचीत करने का एक माध्यम है। 
 
प्रोफेसर डिगबाय टैंनटम ने इसे द इंटरब्रेन फैनोमिना कहा है कि इस फैनोमिना से हम सामने वाले के बारे में जान लेते है , कि वह क्या सोच रहा है। इसका सीधा संबंध आपके तथा सामने वाले के मस्तिष्क से होता है। उनका कहना है कि इस संबंध के वजह से ही लोग किसी फुटबॉल मैच के लिए या किसी त्यौहार के  लिए एक जुट होते है।
 
इंटरनेट द्वारा वीडियो कॉल इस संबंध को तोड़ सकता है। ऐसा भावनात्मक जुड़ाव केवल वातावरण में शामिल होकर आमने - सामने महसूस किया जा सकता है। दूर बैठे इंसान से ये जुड़ाव संभव नहीं है । क्योंकि इसमे आप उनके बात करने का तरीका , सामने वाले के भाव,  हाव भाव अधिक अच्छे से समझ सकते है।


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