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कैलाश पर्वत का क्या है रहस्य

कैलाश पर्वत के अनसुलझा रहस्यों को आज तक कोई भी सुलजा नहीं पाया है | कई वैज्ञानिको ने भी कैलाश पर्वत के रहस्यों का पता लगाना चाहा | पर उन्हें ऐसी कोई भी जानकारी प्राप्त नहीं हुयी | जिनसे कैलाश पर्वत के राज़ खुल सके | कैलाश पर्वत अपने आप में एक रहस्य बन चुका है | लोगो का मानना ये भी है कि क्या भगवान शिव और पार्वती आज भी कैलाश पर्वत में निवास करते है | ये बात सच है या झूठ  ये कोई नही जानता | पर कैलाश पर्वत के अन्दर ऐसा कुछ तो मौजूद  है | जिस कारण आज तक ये पर्वत एक रहस्य बना हुआ है |  

माना जाता है कि  कैलाश पर्वत के चारो ओर अनेक अलौकिक शक्तियां निवास करती है | बहुत सारे लोगो का मानना है कि कैलाश पर्वत के आसपास समय की गति बढ़ जाती है | कैलाश पर्वत की चढ़ाई करना आम लोगो की बस की बात नहीं है | इसलिए वहा जाने वाले लोग दूर से ही कैलाश पर्वत को नमन करते है | कैलाश मानसरोवर की यात्रा में हर कदम बढ़ाने पर दिव्यता का अहसास होता है | ऐसा लगता है मानो एक अलग ही दुनिया में आ गए हो | 

सालो से लोग कैलाश पर्वत की परिक्रमा लगाने के लिए दूर-दूर  से आते है | माना जाता है जो भी इस पर्वत के 108 बार परिक्रमा लगा लेता है | उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है | पर आज तक कोई भी इस पर्वत के इतने चक्कर नहीं लगा पाया है | कैलाश पर्वत का एक चक्कर लगाना भी आसान नहीं है तो 108 तो बहुत दूर की बात है ! इसलिए तिब्बती लोग इस परिक्रमा का 3 और 13 परिक्रमा का महत्व मानते है | तिब्बतियों का मानना है कि यहाँ परिक्रमा लगाने से लोग अपने जीवन में किये गए पापो का प्रायश्चित करते है |

इतनी ठंडी जगह पर भी है गरम पानी के झरने
ड्रोल्मापास तथा मानसरोवर तट पर खुले आसमान के नीचे ही शिवशक्ति का पूजन भजन करते हैं। यहां कहीं कहीं बौद्धमठ भी दिखते हैं जिनमें बौद्ध भिक्षु साधनारत रहते हैं। दर्रा समाप्त होने पर तीर्थपुरी नामक स्थान है जहाँ गर्म पानी के झरने हैं। इन झरनों के आसपास चूनखड़ी के टीले हैं। कहा जाता है कि यहीं भस्मासुर ने तप किया और यहीं वह भस्म भी हुआ था।

आती है मृदुंग की आवाज़
गर्मी के दिनों में जब मानसरोवर की बर्फ़ पिघलती है, तो एक प्रकार की आवाज़ भी सुनाई देती है। श्रद्धालु मानते हैं कि यह मृदंग की आवाज़ है। मान्यता यह भी है कि कोई व्यक्ति मानसरोवर में एक बार डुबकी लगा ले, तो वह ‘रुद्रलोक’ पहुंच सकता है।

ओम की ध्वनी
पुराणों के अनुसार यहाँ शिवजी का स्थायी निवास होने के कारण इस स्थान को 12 ज्येतिर्लिंगों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। कैलाश बर्फ़ से सटे 22,028 फुट ऊँचे शिखर और उससे लगे मानसरोवर को ‘कैलाश मानसरोवर तीर्थ’ के नाम से जाना जाता है और इस प्रदेश को मानस खंड कहते हैं। कैलाश-मानसरोवर उतना ही प्राचीन है, जितनी प्राचीन हमारी सृष्टि है। इस  जगह पर प्रकाश तरंगों और ध्वनि तरंगों का समागम से  ‘ॐ’ की प्रतिध्वनि उत्पन्न होती है।


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