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मानेड के समुद्री सांप का रहस्य

बिशप पोंटोपिडन भले ही सांपों का वर्णन करने वाले प्राचीन दस्तावेजों पर विश्वास न करते हों, पर वे विशालकाय मछलियों और समुद्री राक्षसों पर जरूर विश्वास करते थे। उन्होंने ‘नेचुरल हिस्ट्री ऑफ नार्वे’ जैसी किताबों में अपने अनुभवों का वर्णन किया है। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण किताब 1746 में लिखी ‘मेनेड सी सर्पेंट’ है।
 
इन भयानक जीवों का जिक्र कैप्टन लॉरेंस द फैरी के लिखे खतों में भी मिलता है। कैप्टन द फैरी जहाज पर बैठे किताब पढ़ रहे थे, तभी उन्होंने जहाज के लोगों को शोर करते हुए सुना। एक यात्री ने उन्हें बताया कि उसने एक बड़ा सांप देखा है। कैप्टन ने सांप का पीछा करने और उसे गोली मारने के आदेश दिए।
 
कैप्टन ने लिखा, “शायद हमारी गोलियों ने सांप को घायल कर दिया था। कयोकि पानी गाढ़ा और लाल हो गया था,  हमारी उससे दूरी बहुत ही कम थी।” सांप का मुंह काफी बड़ा और घोड़े जैसा दिख रहा था। उसकी आंखें काली और गर्दन पर सफेद बाल थे।
 
कैप्टन ने सांप को अपने शरीर की 7-8 कुडंलिया बनाते देखा। इन सांपों के चित्र पादरी हांस स्ट्रोम ने बनाए। उन्होंने दो प्रत्यक्षदर्शियों के विवरण के आधार पर ये चित्र बनाए। इन प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सांप कुछ ऐसी हरकतें कर रहा था, जो आम सांप के लिए करना असंभव है। सांप पानी में अजीब लहरदार तरीके से घूम रहा था।


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