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राज्यपाल की सहायता से हम लाएंगे जम्मू-कश्मीर में सुधार: राम माधव

नई दिल्ली: भाजपा ने पीडीपी से अपना सहयोग वापस ले लिया, जिसके पश्चात जम्मू-कश्मीर में भाजपा -पीडीपी गठजोड़ वाली सरकार गिर गई। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने ही पत्रकार सम्मेलन कर भाजपा के गठजोड़ से अलग होने का ऐलान किया था। भाजपा ने इतना बड़ा निर्णय आखिर क्यों लिया? इसके पीछे क्या वजह थी? जम्मू-कश्मीर को लेकर उनकी आगे की क्या रणनीति है? इसी प्रकार के तमाम प्रश्नों के उत्तर उन्होंने पत्रकारों को दिए। उन्होंने कहा कि ये मुश्किल और कष्टदायक निर्णय था। राम माधव ने कहा कि हमारे पास प्रमुख राष्ट्रीय कल्याण थे,जिसके कारण ये निर्णय लिया गया।
इस वार्ता में राम माधव ने कहा कि घाटी में राजनीतिक पार्टियों ने नागरिकों तक पहुंचने के लिए कुछ भी नहीं किया। गठजोड़ पर उन्होंने कहा कि हमने महसूस किया कि दोनों के मध्य खाई बढ़ रही थी। रमजान के पाक माह में भारत सरकार द्वारा सीजफायर जारी करने और फिर ईद के पश्चात उसे वापस लेने पर पीडीपी की नाराजगी पर उन्होंने कहा कि संघर्ष विराम रमजान माह के लिए था।
राज्य में अब राज्यपाल शासन जारी होने पर राम माधव ने कहा कि हम राज्यपाल की सहायता से स्थिति में सुधार करने में सक्षम होंगे। उन्होंने कहा कि कोई भी गठजोड़ आसान नहीं होता। यह उस वक्त सबसे नैतिक और आवश्यक गठजोड़ था।
साक्षात्कार के दौरान राम माधव ने राज्य में सीजफायर के विस्तार और पाकिस्तान के साथ बातचीत के पीडीपी के प्रस्ताव की निंदा की। उन्होंने कहा कि दल कश्मीर की समस्या का समाधान करने के लिए हुर्रियत की तरह अलगाववादी के साथ सभी हितधारकों से वार्ता करने के लिए तैयार थी। राम माधव ने यह भी जांच की कि राज्य में अभी इलेक्शन बीजेपी के लिए प्राथमिकता नहीं हैं।
इसके अलावा घाटी के खराब स्थिति पर उन्होंने कहा कि हमने कांग्रेस द्वारा की गई गड़बड़ियों की कीमत चुकाई। आतंकवादियों के विरुद्ध कार्रवाई पर उन्होंने कहा कि हम आतंकियों के साथ पूरी तरह से बेरहम होंगे।


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