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राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग में मचा बवाल

राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग विधेयक के नाम पर अभी बवाल मचा है। यह सरकार की सही मंशा के गलत प्रस्तुतीकरण का परिणाम है।  यहां गलती यह हुई कि केवल आयुष चिकित्सकों को ऐलोपैथिक ब्रिज कोर्स करने की बात हो रही है, जबकि यह पाठ्यक्रम सबके लिए होना चाहिए। वास्तव में यह विश्व स्वास्थ्य संगठन के समग्र दृष्टिकोण का प्रायोगिक स्वरूप है , जिसमें सारी ' चिकित्सा पद्धतियों ' की सामान्य कारगर औषधियों का समन्वित प्रयोग प्रस्तावित है।
 
 होम्योपैथ, सिद्ध,  आयुर्वेद, यूनानी, ऐलोपैथी आदि सभी को एक दूसरे की सुविधाजनक प्रभावी दवाएं और विधियां जानने के लिए ब्रिज कोर्स किया जाना चाहिए। इससे सहजता होगी।
 
फ़िलहाल मैं सरकार के ब्रिज कोर्स बनाने की राय से इत्तेफाक नहीं रखता, लेकिन सरकार अगर वास्तव में आयुर्वेद का भला चाहती है तो उसे कुछ कदम उठाने होंगे। उल्लेखनीय है आयुर्वेद की रत्ती, मिलीग्राम में बदलकर वैज्ञानिक ऐलोपैथी हो जाती है। एल्कोहलिक एक्सट्रेक्ट होम्योपैथी हो जाता है। ये वैज्ञानिक बातें यदि ऐलोपैथी के कथित स्वयंभू वैज्ञानिकों को अवैज्ञानिक लगती हैं तो निश्चय ही उनका विज्ञान से कोई संबंध नहीं है। आखिर हो भी कैसे। वास्तविक वैज्ञानिकों की उपलब्धियों के वे दुकानदार ही तो हैं। 


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